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सरजोम बा तरत ब्ह पोरोब

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बा' मुनु जनागर उनुरूम   - (Part - 01) 'हो' कोअः "बा मुनु जनागर" रे हो जति कोअः सिरजोन ओन्डोः अकोव: उनुरूम मरसल अंका कना। बा मुनु जनागर रे, हो जति कोअः सिरजोन, अकोअः उनुरूम, संसकिर दोरोम, मान मनातिङ, दोन-बिन्त, सहित ओन्डोः ओते, रिमिल, चुन्डुः, इपिल्ल, होयो, गड़ा, बुरू, नइ, दरू, तसड-दुम्बु ओन्डोः कलि मिलि जियु-जोन्तु कोअः सिरजोन बुटा संगोम गलङ कना।       हो जति रे "बा पोरोब" रेयः एनेटेः हो जति कोअः सिरजोन मुनु जनागर रे सरूबा कना। सिरजोन एनेटेः रे गोटा दिसुम हेन्दे नुबः गे तइकेना। ओते क तइकेना। होयो क तइकेना। दःक तइकेना। रिमिल क तइकेना। सिंगि, चन्डुः, इपिल्ल को कको तइकेना।  गड़ा, बुरू क तइ केना। दरू, दिरि, तसङ दुम्बु क तइकेना। मनोआ को कको तइकेना। जियु-जोन्तु को ककोu तइकेना। मुसिङ दिन रेयः कजि तना। "ततङ" (सिंगबोंगा) हेन्दे-नुबः दिसुम बुगितेः नेल केड़ा। ओते होयो दः मनोआ, जियु-जोन्तु, दरू-दिरि, तसङ-दुम्बु, सिंगि, चन्दुः इपिल्ल को बंकु दिसुमेः नेल बियर केड़ा।       निमिन मरङ दिसुम रे ततङ जानः जकेड कःए नेल नम केड़ा। अःए एसकर गेःए नेलोः लेना। सम...

किमिन सला (वधू का चुनाव) हिंदी अनुवाद

वीर सिंह जब बूढ़ा हो चला तब उसे अपने एकलौते पुत्र रसिका की शादी की चिन्ता हुई। रसिका की माँ भी घर का काम-धाम अपनी बहू को सौंप कर दुनियादारी से मुक्त होना चाहती थी। एक दिन वीर सिंह ने रसिका से कहा, "हे पुत्र! अब हम दोनों बूढ़े हो चले। अब तुम्हारी शादी हो जानी चाहिए। अपनी बहू के लिए हमने तीन कन्या को देखा है। एक गाँव के पूर्व में, दूसरी पश्चिम में और तीसरी दक्षिण में है। अब तुम तीनों में से एक को चुनकर बताओ ताकि तुम्हारी शादी अविलम्ब कर दी जाए। होशियारी से वधू का चुनाव करना। "मड़े बुरू कंणा डोम" अर्थात् आँख रहते अन्धा न बनना।" रसिका ने कहा कि यदि आपकी ऐसी इच्छा है, तो ऐसा ही होगा, "अयं गूगु दिरि लेकानिः" यानी मेरे लिए इशारा ही काफी है। पिताजी! अब मैं एक भिखारी का रूप धारण कर परीक्षा के लिए जाता हूँ। वीर सिंह ने अपने बेटे को आनन्द से विदा किया। रसिका के पिता ने चुने हुए गाँवों में से एक गाँव में पहुँच कर आवाज लगाई, "भिखारी को थोड़ा-सा अन्न मिले मालकिन ! भूख-प्यास से मर रहा हूँ। कुछ मिले मालकिन !" भिखारी को देखकर घर से एक युवती आई और बोली, "ओ भि...

'हो' जाति का सामान्य परिचय

 'हो' झारखण्ड राज्य की प्रमुख जनजाति है। यह झारखण्ड राज्य की चौथी सबसे बड़ी जनजाति है। मुख्य रूप से ये सिंहभूम जिले में निवास करते हैं। सिंहभूम जिला का क्षेत्रफल 9906.9 वर्ग किलोमीटर है तथा 23 प्रखण्ड हैं। यह जिला लगभग 85.2° पूर्व से 89.2° पूर्वी देशान्तर तथा 22° उत्तरी आक्षांश से 22.9° उत्तरी अक्षांश के मध्य अवस्थित है।' बिहार एवं उड़ीसा राज्य में 1981 की जनगणना के अनुसार हो बोलने वालों की जनसंख्या 8,02000 है तथा पश्चिमी सिंहभूम की कुल जनसंख्या 1991 की जनगणना के अनुसार 1788614 है जिसमें अनुसूचित जनजाति की आबादी 974700 है। सिंहभूम जिले के कोल्हान एवं पोड़ाहाट क्षेत्र में सम्पूर्ण जनजाति का लगभग 99.8% (4,53,988) हो जनजाति के लोग निवास करते हैं। डॉ. जानुम सिंह पिंगुवा ने "कोल्हान की 'हो' जाति के पर्व-त्योहार एवं कृषि कार्य" नामक पुस्तक की भूमिका में सिंहभूम जिले में इनकी जनसंख्या लगभग 6,00000 तथा उड़ीसा में करीब 4,00000 बतलाया है। पुराने सिंहभूम जिले का विस्तार भौगोलिक दृष्टि से 21.59 उत्तर अक्षांश और 85.2° तथा 85.50° पूर्वी अक्षांश के मध्य अवस्थित है। इसके ...

Lako Bodra (लाको बोदरा)

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 लाको बोदरा लाको बोदरा का जन्म कोल्हान - सिंहभूम दिशुम के खूंटपानी प्रखण्ड के अयोध्या पीढ़ पाहसेया नामक राजस्व गाँव में सन् 19 सितंबर 1919 ई. में हुआ था। लाको बोदरा में के पिता लेबेया बोदरा एक धनी किसान थे। माता का नाम जानो कुई था । पाहसेया गाँव में अधिकांशतः बोदरा किलि (गोत्र) के लोग निवास करते हैं। 30-40 परिवारों का यह गाँव समतल एवं मैदानी इलाके में अवस्थित है। चाईबासा-चक्रधरपुर के बीच सड़क किनारे अवस्थित खूँटपानी गाँव से उत्तर दिशा में पाहसेया जाने में लगभग चार किमी की दूरी तय करनी पड़ती है। पाहसेया गाँव के पूरब दिशा में दोपाई गम्हरिया, पश्चिम में बड्चोम हातु, टाकुरा गुटू, उत्तर में चुडुयुः तथा दक्षिण में दोपाई आदि गाँव अवस्थित हैं। इसी पाहसेया गाँव में लाको बोदरा का जन्म हुआ था। वंश वृक्ष का संक्षिप्त परिचय इस प्रकार है: लाको बोदरा का वंशवृक्ष लेबेया बोदरा के चार पुत्र- 1. सुमी कुई 2. लाको बोदरा 3. डेलका कुई 4. बालेमा कुई 5. दामु बोदरा। इस वंश वृक्ष के आधार पर लाको बोदरा अपने पिता लेबेया बोदरा के पाँच सन्तानों में दूसरी सन्तान थे। वे बचपन से ही चंचल थे। बड़े बुजुर्...