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भाषा का महत्व

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 एक समय की बात है, एक छोटे से गाँव में एक बच्चा था जिसका नाम रिमिल था। रिमिल को अपनी मातृभाषा, हो भाषा, बोलने में बहुत गर्व महसूस होता था। लेकिन जब वह शहर के स्कूल में पढ़ने गया, तो उसे अन्य भाषाओं का भी ज्ञान होना जरूरी था। शहर के बच्चे उसकी भाषा का मजाक उड़ाते और उसे अलग-थलग महसूस कराते। रिमिल दुखी हो गया और उसने अपनी भाषा बोलना छोड़ दिया। लेकिन एक दिन, एक नए शिक्षक ने स्कूल में आकर बच्चों को विभिन्न भाषाओं की सुंदरता और महत्व समझाया। शिक्षक ने रिमिल को भी प्रोत्साहित किया और उसे अपनी भाषा में एक कविता सुनाने को कहा। रिमिल ने धीरे-धीरे अपनी भाषा में कविता सुनाई और सभी बच्चे मंत्रमुग्ध हो गए। उन्होंने रिमिल की भाषा की सराहना की और उससे हो भाषा सीखने की इच्छा जताई। इस घटना ने रिमिल को अपनी भाषा के प्रति फिर से गर्व महसूस कराया और उसने अपने साथियों को हो भाषा सिखाना शुरू किया। गाँव और शहर के बच्चे एक साथ मिलकर हो भाषा में गीत गाने लगे और उनकी दोस्ती गहरी हो गई। यह कहानी हमें यह सिखाती है कि हर भाषा की अपनी एक अनूठी सुंदरता होती है और हमें अपनी भाषा के प्रति गर्व महसूस करना चाहिए।

किमिन सला (वधू का चुनाव) हिंदी अनुवाद

वीर सिंह जब बूढ़ा हो चला तब उसे अपने एकलौते पुत्र रसिका की शादी की चिन्ता हुई। रसिका की माँ भी घर का काम-धाम अपनी बहू को सौंप कर दुनियादारी से मुक्त होना चाहती थी। एक दिन वीर सिंह ने रसिका से कहा, "हे पुत्र! अब हम दोनों बूढ़े हो चले। अब तुम्हारी शादी हो जानी चाहिए। अपनी बहू के लिए हमने तीन कन्या को देखा है। एक गाँव के पूर्व में, दूसरी पश्चिम में और तीसरी दक्षिण में है। अब तुम तीनों में से एक को चुनकर बताओ ताकि तुम्हारी शादी अविलम्ब कर दी जाए। होशियारी से वधू का चुनाव करना। "मड़े बुरू कंणा डोम" अर्थात् आँख रहते अन्धा न बनना।" रसिका ने कहा कि यदि आपकी ऐसी इच्छा है, तो ऐसा ही होगा, "अयं गूगु दिरि लेकानिः" यानी मेरे लिए इशारा ही काफी है। पिताजी! अब मैं एक भिखारी का रूप धारण कर परीक्षा के लिए जाता हूँ। वीर सिंह ने अपने बेटे को आनन्द से विदा किया। रसिका के पिता ने चुने हुए गाँवों में से एक गाँव में पहुँच कर आवाज लगाई, "भिखारी को थोड़ा-सा अन्न मिले मालकिन ! भूख-प्यास से मर रहा हूँ। कुछ मिले मालकिन !" भिखारी को देखकर घर से एक युवती आई और बोली, "ओ भि...

'हो' जाति का सामान्य परिचय

 'हो' झारखण्ड राज्य की प्रमुख जनजाति है। यह झारखण्ड राज्य की चौथी सबसे बड़ी जनजाति है। मुख्य रूप से ये सिंहभूम जिले में निवास करते हैं। सिंहभूम जिला का क्षेत्रफल 9906.9 वर्ग किलोमीटर है तथा 23 प्रखण्ड हैं। यह जिला लगभग 85.2° पूर्व से 89.2° पूर्वी देशान्तर तथा 22° उत्तरी आक्षांश से 22.9° उत्तरी अक्षांश के मध्य अवस्थित है।' बिहार एवं उड़ीसा राज्य में 1981 की जनगणना के अनुसार हो बोलने वालों की जनसंख्या 8,02000 है तथा पश्चिमी सिंहभूम की कुल जनसंख्या 1991 की जनगणना के अनुसार 1788614 है जिसमें अनुसूचित जनजाति की आबादी 974700 है। सिंहभूम जिले के कोल्हान एवं पोड़ाहाट क्षेत्र में सम्पूर्ण जनजाति का लगभग 99.8% (4,53,988) हो जनजाति के लोग निवास करते हैं। डॉ. जानुम सिंह पिंगुवा ने "कोल्हान की 'हो' जाति के पर्व-त्योहार एवं कृषि कार्य" नामक पुस्तक की भूमिका में सिंहभूम जिले में इनकी जनसंख्या लगभग 6,00000 तथा उड़ीसा में करीब 4,00000 बतलाया है। पुराने सिंहभूम जिले का विस्तार भौगोलिक दृष्टि से 21.59 उत्तर अक्षांश और 85.2° तथा 85.50° पूर्वी अक्षांश के मध्य अवस्थित है। इसके ...

कुला एंगा ओन्डो: अयःअ होन किङ ho kahani

मु नु का ड़रेयःअ कजि। मियड् गुंडि उरिइ ओन्डोः मियड् एंगा🦁 कुला मिय‍ड् बिर रेकिङ टइकेना।   अकिङ एसु जुड़ी ओन्डो: जेताओ ककिङ बपागे टइकेना। एन दिपिलं कुलाको जिलु कको जो'म टइकेना, उरि:इ-मेरोमको लेका दुम्बु-तसड़ को अतिकेन टइकेना। एना मेन्ते एंगा कुला क रेन:ए हियातिकेना चि अयःअ जुम्पा जुड़ी उरिइ एटः कुला एमन जा को चिकइतेया।  एंगा कुला बरिया हो' होनकिङेए होनन् टइकेना। एन् होनकिङ एसु मो:ए-मोए ओन्डोः पकोड़ोगेकिङ हरा मरङो:तन टइकेना। मुसिं तरा सिंगी गुंडी उरि:इ अन्डो एंगा कुला गड़ा दःअ नू तेकिङ सेनलेना । गुडि उरिइ गड़ा चेतन पारे ओन्डोः एंगा कुला लतर पारे दःअकिङ नूतन टइकेना। गुंडी उरिइ दःअ नू नूतेःए इई केडा ओन्डोः इई गुरिइ दःअरे लोवामेयन्ते एंगा कुला नूतन पा ते अतु आंदूयना। एंगा कुला गुरिइ लोवम् दःअःए नूकेडा ओन्डो: एसु नोगोड़ सिबिल कि:इया । एन्तेःए उडुतना चि अयःअ इई गुरिइ लोवम् दःअ निमिन सिबिल तेदो अय:अ होमोह् जिलु चिमिन तोरं नोगोडा। एन उडुः कुलाःअ मोलोंरे सरूबेयना ओन्डोः गुडी उरि:इ जोमिइ लगिङेःए उडुदिटाकेडा ।  द:अ नूके ते रूहाउरातनरे एंगा कुला चनब होरा गुंडि उरिइ दोयारे ए आंइल चोप...