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सरजोम बा तरत ब्ह पोरोब

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बा' मुनु जनागर उनुरूम   - (Part - 01) 'हो' कोअः "बा मुनु जनागर" रे हो जति कोअः सिरजोन ओन्डोः अकोव: उनुरूम मरसल अंका कना। बा मुनु जनागर रे, हो जति कोअः सिरजोन, अकोअः उनुरूम, संसकिर दोरोम, मान मनातिङ, दोन-बिन्त, सहित ओन्डोः ओते, रिमिल, चुन्डुः, इपिल्ल, होयो, गड़ा, बुरू, नइ, दरू, तसड-दुम्बु ओन्डोः कलि मिलि जियु-जोन्तु कोअः सिरजोन बुटा संगोम गलङ कना।       हो जति रे "बा पोरोब" रेयः एनेटेः हो जति कोअः सिरजोन मुनु जनागर रे सरूबा कना। सिरजोन एनेटेः रे गोटा दिसुम हेन्दे नुबः गे तइकेना। ओते क तइकेना। होयो क तइकेना। दःक तइकेना। रिमिल क तइकेना। सिंगि, चन्डुः, इपिल्ल को कको तइकेना।  गड़ा, बुरू क तइ केना। दरू, दिरि, तसङ दुम्बु क तइकेना। मनोआ को कको तइकेना। जियु-जोन्तु को ककोu तइकेना। मुसिङ दिन रेयः कजि तना। "ततङ" (सिंगबोंगा) हेन्दे-नुबः दिसुम बुगितेः नेल केड़ा। ओते होयो दः मनोआ, जियु-जोन्तु, दरू-दिरि, तसङ-दुम्बु, सिंगि, चन्दुः इपिल्ल को बंकु दिसुमेः नेल बियर केड़ा।       निमिन मरङ दिसुम रे ततङ जानः जकेड कःए नेल नम केड़ा। अःए एसकर गेःए नेलोः लेना। सम...

कारेम नमेया दिसुम(हो शिष्ट गीत)- दुर्गा पुरती JSSC

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कारेम नमेया दिसुम,  नबु जोनोम दिसुम लेका कारेम नमेया। बुरु कोते गाड़ा कोते,  बाकाइया कन बियुर सेकोर कारेम नमेया। सिंगीम नेली रिमिल पायं,  निपलि चन्डुः जिलब जोलोब कारेम नमेया। बाड़ा कना डाली मुतिड्,  जेंगा पुन्डी लील गुलाब कारेम नमेया। पेरे आकना जिनिस कोते,  सोना हीरा बिचा ताम्बा कारेम नमेया। दिसुम नोड़ो को नासुल तना,  'टाटा' लेकन कारखाना कारेम नमेया। 'पुरती' सारीम काजी तना,  ने लेकान सुन्दोर दिसुम कारेम नमेया।  - दुर्गा पुरती hogkkahan/karem nameya disum

भाषा का महत्व

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 एक समय की बात है, एक छोटे से गाँव में एक बच्चा था जिसका नाम रिमिल था। रिमिल को अपनी मातृभाषा, हो भाषा, बोलने में बहुत गर्व महसूस होता था। लेकिन जब वह शहर के स्कूल में पढ़ने गया, तो उसे अन्य भाषाओं का भी ज्ञान होना जरूरी था। शहर के बच्चे उसकी भाषा का मजाक उड़ाते और उसे अलग-थलग महसूस कराते। रिमिल दुखी हो गया और उसने अपनी भाषा बोलना छोड़ दिया। लेकिन एक दिन, एक नए शिक्षक ने स्कूल में आकर बच्चों को विभिन्न भाषाओं की सुंदरता और महत्व समझाया। शिक्षक ने रिमिल को भी प्रोत्साहित किया और उसे अपनी भाषा में एक कविता सुनाने को कहा। रिमिल ने धीरे-धीरे अपनी भाषा में कविता सुनाई और सभी बच्चे मंत्रमुग्ध हो गए। उन्होंने रिमिल की भाषा की सराहना की और उससे हो भाषा सीखने की इच्छा जताई। इस घटना ने रिमिल को अपनी भाषा के प्रति फिर से गर्व महसूस कराया और उसने अपने साथियों को हो भाषा सिखाना शुरू किया। गाँव और शहर के बच्चे एक साथ मिलकर हो भाषा में गीत गाने लगे और उनकी दोस्ती गहरी हो गई। यह कहानी हमें यह सिखाती है कि हर भाषा की अपनी एक अनूठी सुंदरता होती है और हमें अपनी भाषा के प्रति गर्व महसूस करना चाहिए।

किमिन सला (वधू का चुनाव) हिंदी अनुवाद

वीर सिंह जब बूढ़ा हो चला तब उसे अपने एकलौते पुत्र रसिका की शादी की चिन्ता हुई। रसिका की माँ भी घर का काम-धाम अपनी बहू को सौंप कर दुनियादारी से मुक्त होना चाहती थी। एक दिन वीर सिंह ने रसिका से कहा, "हे पुत्र! अब हम दोनों बूढ़े हो चले। अब तुम्हारी शादी हो जानी चाहिए। अपनी बहू के लिए हमने तीन कन्या को देखा है। एक गाँव के पूर्व में, दूसरी पश्चिम में और तीसरी दक्षिण में है। अब तुम तीनों में से एक को चुनकर बताओ ताकि तुम्हारी शादी अविलम्ब कर दी जाए। होशियारी से वधू का चुनाव करना। "मड़े बुरू कंणा डोम" अर्थात् आँख रहते अन्धा न बनना।" रसिका ने कहा कि यदि आपकी ऐसी इच्छा है, तो ऐसा ही होगा, "अयं गूगु दिरि लेकानिः" यानी मेरे लिए इशारा ही काफी है। पिताजी! अब मैं एक भिखारी का रूप धारण कर परीक्षा के लिए जाता हूँ। वीर सिंह ने अपने बेटे को आनन्द से विदा किया। रसिका के पिता ने चुने हुए गाँवों में से एक गाँव में पहुँच कर आवाज लगाई, "भिखारी को थोड़ा-सा अन्न मिले मालकिन ! भूख-प्यास से मर रहा हूँ। कुछ मिले मालकिन !" भिखारी को देखकर घर से एक युवती आई और बोली, "ओ भि...